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प्रसव के तीन चरण

2 min |

प्रसव को आम तौर पर तीन चरणों में बांटा जाता है। पहला चरण लगभग सबके लिए सबसे लंबा होता है, लेकिन इसकी लंबाई बहुत ही परिवर्तनशील होती है। एक घंटे से लेकर 20 घंटों के बीच तक की कोई भी अवधि सामान्य मानी जाती है।प्रसव की शुरुआत शिशु से मिलने वाले हॉर्मोनल ट्रिगर्स की अनुक्रिया के रूप में होती है। शिशु की एड्रीनल ग्लैंड (अधिवृक्क ग्रंथि) विकसित होकर कॉर्टीसोन नामक हॉर्मोन का स्राव करना शुरु करती है। इसकी अनुक्रिया में मां के अंदर प्रोस्टाग्लैंडिंस नामक हॉर्मोनों का स्राव होता है - और यही वे हॉर्मोन होते हैं जो गर्भाशय के संकुचन की प्रक्रिया आरंभ कराते हैं।

चरण 1

प्रत्येक संकुचन के साथ:

  • गर्भाशय शिशु को नीचे की ओर धकेलता है।
  •  सर्विक्स खुलता है और पतला हो जाता है।
  • पहले चरण के अंत तक सर्विक्स पूरी तरह खुल जाता है; इतना पर्याप्त कि उसमें से शिशु बाहर निकलकर जननमार्ग (योनि) से गुजर सके। इसे 10 centimeter तक या पूरी तरह फैला हुआ बताया जाता है।
  • प्रसव के आरंभ में संकुचन कैसे बदलते हैं, संकुचन लगभग 40 सेकेंड तक रहते हैं, प्रत्येक 10 मिनट में एक बार। अंत तक, प्रत्येक संकुचन एक मिनट से अधिक समय तक रहता है, जिनमें प्रत्येक के बीच एक मिनट से अधिकका अंतराल नहीं होता है।

इसके बढ़ने के साथ-साथ प्रसव प्रक्रिया की गति बढ़ती जाती है। पुनः पांच centimeter फैलने के लिए सर्विक्स को पहले पांच centimeter की तुलना में सामान्य रूप से बहुत ही कम समय लगता है। अधिकतर महिलाएं प्रसव के इस चरण का बहुत अच्छी तरह से सामना करती हैं यदि वे निःसंकोच रूप से उस पोज़ीशन को अपनाएं जिसमें उन्हें सबसे बेहतर महसूस होता है। इनमें शामिल हैं:

  • घुटने के बल बैठना
  • फर्श पर कुशन पर या अपने साथी की गोद में आगे की ओर झुकना
  • दीवार के सहारे झुकना
  • चारों हाथ-पैर के बल शरीर को टिकाना ...और ऐसा कुछ जिससे सहूलियत हो - अलग-अलग समय में आपके लिए अलग-अलग पोज़ीशन कारगर हो सकती हैं।

आपके शिशु के दिल की निगरानी

  • प्रसव के दौरान, भ्रूणीय अवलोकन द्वारा आपके शिशु की हृदय गति की माप के जरिए उसके स्वास्थ्य पर करीब से नज़र रखी जाती है।
  • नर्स या डॉक्टर पिनार्ड स्टेथोस्कोप का इस्तेमाल कर सकते हैं जो एक किस्म के ईयर ट्रंपेट की तरह दिखता है। वे इसे आपके पेट पर रखकर शिशु के दिल की धड़कन सुनेंगे।
  • आपको एक इलेक्ट्रॉनिक फीटल मॉनीटर से जोड़ा जा सकता है जो शिशु के दिल की धड़कन का पता लगाता है और उसे संख्या के रूप में स्क्रीन पर प्रदर्शित करता है।
  • वैकल्पिक रूप से, एक छोटा इलेक्ट्रोड शिशु के सिर की त्वचा पर क्लिप किया जाता है जो दिल की धड़कन का पता लगाता है और परिणाम, मशीन को भेज दिया जाता है। मॉनीटरिंग का यह रूप सतत हो सकता है।
  • मॉनीटरिंग के लिए एक डॉप्लर मशीन अल्ट्रासाउंड का इस्तेमाल करती है। दिल की धड़कन का पता लगाने के लिए एक छोटा सा ट्रांसमीटर-रिसीवर आपके पेट पर लगाया जाता है।

चरण 2

प्रसव का दूसरा चरण तब शुरू होता है जब सर्विक्स पूरी तरह फैल जाता है और इसका समापन आपके शिशु के जन्म के साथ होता है। यह चरण कुछ मिनटों से लेकर कुछ घंटों तक रहता है। आप दूसरे चरण में हैं यह बात आप तब जानेंगी जब आपको नीचे की ओर पुश करने की तीव्र आवश्यकता का अनुभव होगा। यदि आपको एपिड्यूरल दिया गया हो, तो हो सकता है आप इसका इतनी तीव्रता से या बिल्कुल भी अनुभव न कर पाएं। यह पुशिंग ‘बेयरिंग डाउन’ कहलाती है। नर्स या आपके डॉक्टर आपको बताएंगे कि यदि आप इसे अनुभव नहीं कर पाती हैं तो आपको क्या करना चाहिए।

बेयर डाउन के लिए आपको अपनी सांस रोककर रखने की आवश्यकता महसूस हो सकती है; लेकिन इसे देर तक न रोकें। आपकी नर्स/डॉक्टर बेहतर जानते हैं। वे आपको यह भी कह सकते हैं कि पुश न करें - शायद इसलिए कि सर्विक्सका एक छोटा सा ‘लिप’ अभी भी फंसा हुआ हो। जब लिप फैल जाता है, तब आप पुश करने के लिए तैयार होती हैं। 

वे आपको यह भी कह सकते हैं कि पुश न करें - शायद इसलिए कि सर्विक्स का एक छोटा सा ‘लिप’ अभी भी फंसा हुआ हो। जब लिप फैल जाता है, तब आप पुश करने के लिए तैयार होती हैं। आपसे कहा जा सकता है कि आप हल्की, धीमी सांसों के साथ ‘जोर लगाकर शिशु को बाहर निकालें’।  कुछ महिलाएं बेयर डाउन करने की आवश्यकता महसूस नहीं करतीं हैं, यहां तक कि तब भी नहीं जब उनको एपिड्यूरल न दिया गया हो।  शिशु आसानी से बाहर निकल आता है। ऐसा होने की संभावना केवल तभी होती है जब आपके कुछ बच्चे हो चुके हों।

अपने शिशु को पहली बार देखना

जब योनिमुख पर शिशु का सिर पूरी तरह दिखाई पड़ने लगता है, तो इसे ‘क्राउनिंग’ कहा जाता  है। यदि आप चाहें तो आप स्वयं या आपके साथी आपको आइने की मदद से इसे दिखा सकते हैं, इस तरह आप इस क्षण को देख सकती हैं। अगले एक या दो संकुचन के साथ आपके शिशु का सिर सबसे पहले बाहर आता है और फिर इसके बाद उसका बाकी का हिस्सा निकलता है। आपके संबंधित डॉक्टर या नर्स आपके शिशु को हौले से उठाकर आपकी बांहों में अथवाआपके पेट पर रखेंगे ताकि आप इस खूबसूरत नन्हें चमत्कार को देख पाएं।

आपके लिए सबसे बढ़िया पोज़ीशन (शारीरिक अवस्थिति)

कोई भी पोज़ीशन जिसमें आप संकुचनों के बीच यथासंभव अधिक आराम महसूस करें, और जिसमें आपका शिशु सुरक्षित बाहर निकले।

  • सहारे के साथ खड़ी मुद्रा में बैठने (स्क्वैट) से आपका पेड़ू (पेल्विस) पूरी तरह खुल जाता है और आपका शिशु गुरुत्वाकर्षण बल की मदद से बाहर आ जाता है।
  • आपके शरीर के ऊपरी हिस्से को सहारे की जरूरत होती है ताकि आपका संतुलन बना रहे। यदि आपका साथी पर्याप्त मज़बूत हो तो वह आपको आपकी बांहों के नीचे से पीछे की ओर से पकड़कर रख सकते हैं। आपके घुटने आपके कूल्हों से अधिक ऊंचे नहीं होने चाहिए (इससे आपके जोड़ों पर दबाव पड़ेगा)।
  • आधे रूप से बैठने की स्थिति में एक स्टूल या कुर्सी से आपको सहारा मिलेगा। आपको संभाले रखने की भी आवश्यकता हो सकती है।
  • आपको संकुचनों के बीच चारों हाथ-पैरों पर शरीर को टिकाने से आगे की ओर झुकने से आराम मिलता है।
  • सीधा लेटना शिशु के जन्म में बहुत कारगर नहीं होता। आपके पेड़ू में कुछ खिंचाव होता है, और आपके शिशु को गुरुत्वाकर्षण के विरुद्ध ‘ऊपर की ओर’ गति करना पड़ता है।  बिस्तर पर चढ़कर बैठना और बहुत सारे तकियों का टेक लगा होना और शायद आपके साथी का सहारा, एक बढ़िया उपाय है।
  • यदि आप थक गई हों और अधिक खड़ी स्थिति में न बैठ पा रही हो तो करवट की स्थिति में आपके ऊपरी पैर का उठे हुए होना आपके लिए आरामदेह होता है।  

जन्म का क्षण

आपके शिशु का सिर आम तौर पर आपकी पीठ की तरफ मुंह करके निकलता है। दाई, शिशु के गर्भनाल की जांच कर सकती है यह सुनिश्चित करने के लिए कि यह गरदन के चारों ओर लिपटी न हो। फिर कंधे घुमाए जाते हैं जिससे शरीर बगल की तरफ रहे और सिर, अब आपके बाहर होता है, वह भी बगल की ओर मुड़ता है।

कभी-कभी बच्चे को बाहर निकालने के लिए फोरसेप्स का इस्तेमाल किया जाता है। फोरसेप्स जुड़े हुए चम्मचों का एक सेट होता है जो शिशु के सिर को पकड़कर उसे निकालने में मदद करता है। वेंटोस में एक वैक्युम पंप होता है जिसका सहारा शिशु को बाहर निकालने   के लिए लिया जाता है। शिशु को और जल्दी बाहर निकालने में इनकी मदद ली जा सकती है, उदाहरण के लिए इन स्थितियों में:

  • यदि वह अस्वस्थ हो - दिल की धड़कन धीमी हो, या यदि शिशु मैकोनियम पास कर देता है (यह शिशु के मलाशय का पदार्थ होता है) जो लिकर (एम्नियोटिक द्रव) को गंदा कर देता है, या यह शिशु के सिर की त्वचा से लिए गए रक्तके नमूने में दिखता है।
  • यदि उसके बाहर निकलने में कठिनाई हो रही हो क्योंकि हो सकता है उसकी शारीरिक स्थिति सही न हो, या मां का पेड़ू पूरी तरह खुल न रहा हो।
  • यदि आपके संकुचन धीमे पड़ गए हों, या आप थक गई हों, तो ऐसी स्थिति में फोरसेप्स की मदद लेना जरूरी होता है।
  • यदि शिशु समय-पूर्व है, इसका अर्थ है उसके सिर की मुलायम हड्डियों को अधिक सुरक्षा की ज़रुरत है।

कभी-कभी शिशु के सिर को खींचने के क्रम में पेरिनियम फट जाती है। अथवा, नर्स/डॉक्टर पूछ सकते हैं कि क्या वे पेरिनियम को काट सकते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि यह बुरी तरह से फटने वाला है या शिशु को तुरंत बाहर निकालना जरूरी है। यदि फोरसेप्स का इस्तेमाल होना है, तो इसे काटा जाएगा। इस चीरे को एपिज़ियोटोमी के रूप में जाना जाता है। बड़े चीरे और एपिज़ियोटोमी को बाद में सिलना पड़ता है। जब यह किया जाएगा तो उस दौरान आपको लोकल एनेस्थेटिक दिया जाएगा। टांके अपने-आप घुल जाएंगे; आमतौर पर आपको उन्हें निकलवाने की जरूरत नहीं होती है।

चरण 3

  • प्रसव का तीसरा चरण है प्लेसेंटा (अपरा या गर्भनाल) और झिल्लियों का बाहर निकलना। इसकी प्रक्रिया आपके शिशु के जन्म के कुछ ही मिनट बाद आरंभ हो जाती है और 10-20 मिनट के बीच तक जारी रहती है। आपको इस तीसरे चरण के होने का शायद ही पता चले।
  • आमतौर पर आपकी जांघ या नितंब में हॉर्मोन का इंजेक्शन लगाया जाता है, जिससे गर्भाशय संकुचित होने के लिए प्रेरित होता है। यह इंजेक्शन तब दिया जाता है जब आपका शिशु जन्म ले रहा होता है, आमतौर पर जब पहला कंधा बाहर निकलता है। ऐसा करने से पहले नर्स आपकी सहमति के लिए पूछेंगी।
  • फिर, जैसे ही आपके शिशु का जन्म हो जाता है तो गर्भनाल को गांठ लगाकर काट दिया जाता है।
  • गर्भाशय बहुत तेज़ी से सिकुड़ता है और प्लेसेंटा (अपरा) खुद को गर्भाशय की भीतरी दीवार से अलग कर लेता है। आप प्लेसेंटा को बाहर पुश कर सकती हैं, अथवा ऐसा न हो सके तो नर्स गर्भाशय की सुरक्षा के लिए एक हाथआपके पेट पर रखकर प्लेसेंटा की डिलवरी में मदद करती है जबकि नाल दूसरे के साथ तनी हुई स्थिति में रहती है।
  • प्लेसेंटा के निकलने के साथ ही इससे जुड़ी हुई रक्त नलिकाएं बंद हो जाती हैं और रक्त का बहना रुक जाता है (हालांकि थोड़ा रक्त बहना सामान्य है)।
  • एक तीसरा शारीरिक चरण - जिसमें इंजेक्शन का उपयोग नहीं किया जाता है और नाल के कटने का इंतजार किया जाता है और प्लेसेंटा की डिलवरी में मदद नहीं की जाती है - यह तब होता है जब आपके डॉक्टर चीज़ों को कुदरतीरूप से होने देने का फैसला करते हैं।
  • शिशु को स्तन से दूध पिलाने की क्रिया या फिर शिशु को बस वहां रखने मात्र से ऑक्सीटोसिन हॉर्मोन का स्राव शुरू हो जाता है। यह आपके गर्भाशय पर क्रिया करता है जो फिर सिकुड़ता है और प्लेसेंटा तथा झिल्लियों को बाहर निकालता है। नाल को उसका स्पंदन रुक जाने पर और प्रायः प्लेसेंटा के बाहर निकल आने पर काट दिया जाता है।
  • यदि आप कुदरती तीसरे चरण का विकल्प चाहती हैं तो अपनी देखभाल करने वाले लोगों को बताएं और प्रसव के लिए जाने से पहले इस बारे में बात कर लें। यदि आपको अपनी गर्भावस्था के दौरान या प्रसव के दौरान समस्याएं होती हैं तो कुदरती तीसरा चरण आपके लिए सुरक्षित विकल्प नहीं होगा।