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शिशु के जन्म के बाद स्वास्थ्य और अवसाद

शिशु के जन्म के बाद आपको लगेगा कि आपको अतिरिक्त मदद और सहारे की ज़रूरत है। अपेक्षित चीजों के बारे में जानना - और यह मालूम होना कि ज़रूरी जानकारी कहां से मिलेगी, आपके लिए मददगार होगा। शिशु-जन्म के बाद स्वास्थ्य और अवसाद के बारे में यहां वे सारी बातें बताई गई हैं जिन्हें जानना आपके लिए जरूरी है।

  • शिशु-जन्म के बाद अवसाद यानी पोस्टनेटल डिप्रेशन (पीएनडी) दरअसल एक सामान्य बात है। लगभग 15% नई मांएं इससे प्रभावित होती हैं लेकिन ज्यादातर महिलाएं थकान, उदासी, समय-समय पर तनावग्रस्त, अलग-थलग और अकेली महसूस करती हैं।
  • इसकी शुरुआत आमतौर पर शिशु के जन्म के लगभग तीन सप्ताह या उसके बाद होती है।
  • अलग-थलग पड़ने का भाव प्रसव-पश्चात के स्वास्थ्य और अवसाद का हिस्सा होता है। बच्चे के जन्म के बाद घर से बाहर निकलना और दोस्तों से संपर्क में रहना थोड़ा मुश्किल हो जाता है। या जब आप बाहर जाती हैं तो आप खुद की तुलना में हर किसी को बेहतर तरीके से चीजों से निपटते देखती हैं और ऐसे में आप पहले से भी बुरा महसूस करती हैं।
  • ऐसा हो सकता है कि वह अपराधबोध और निराशा, अवसाद के अंग हों। हो सकता है आप इसलिए बुरा महसूस करने लगें कि आपको लगता हो कि आप अपने बच्चे से उतना प्यार नहीं करतीं जितना कि आपको करना चाहिए। अथवा हो सकता है कि आपको लगता था मां बनना एक अद्भुत बात होगी लेकिन अब हकीकत में आपको वैसा अनुभव न हो रहा हो।
  • कुछ विशेषज्ञ मानते हैं कि इसका कारण आपके हॉर्मोनों के बदलाव से जुड़ा हो सकता है।

यदि आप प्रसव-पश्चात के अवसाद से पीड़ित हैं तो आप कुछ इस प्रकार महसूस करेंगी:

  1. आपको हर दिन सुबह जागने पर थकान महसूस होगी, यहां तक कि बहुत देर तक भरपूर सो लेने के बाद भी।
  2. आपको किसी भी चीज़ पर ध्यान केंद्रित करने में या खुद को व्यवस्थित करने में या दूसरे सामान्य कामकाज में मुश्किल होगी।
  3. आप ऐसा महसूस करेंगी कि आप एक असफल मां हैं।
  4. आप वैसा महसूस नहीं कर रही होंगी जैसा कि दूसरे कर रहे हों।
  5. आप रुआंसा महसूस करती हैं और कभी-कभी आप रो भी पड़ती हैं और आपको पता नहीं चलता कि क्यों।
  6. आपको समय का पता नहीं चलता और घंटों निकल जाते हैं और आप जान नहीं पातीं कि आप क्या करती रहीं।

यदि आपमें इनमें से कोई भी प्रसव-पश्वात के लक्षण दिखाई पड़ते हैं जो प्रायः आपको चिंता में डालने के लिए काफी हैं, तो आपको मदद की जरूरत है। समय-समय पर हर कोई थका हुआ, उदास और थोड़ा रोने जैसा महसूस करता है, लेकिन आपके साथ ऐसा यदि बार-बार होने लगे तो आपको प्रसव-पश्वात उत्पन्न होने वाला अवसाद हो सकता है।

आपकी मदद की जा सकती है

  • आपके डॉक्टर आपको अवसाद-रोधी दवा लेने की सिफारिश कर सकते हैं, या आपके लिए मदद के दूसरे तरीके सुझा सकते हैं।
  • आपके साथी, मित्र और परिवार के लोग भी आपकी मदद कर सकते हैं और आपको सहारा दे सकते हैं। आपको यह छिपाने की जरूरत नहीं कि आप कितना बुरा महसूस करती हैं क्योंकि इस समय आपको बहुत सहारे की ज़रूरत होती है।
  • ऐसी स्थिति में एक काउंसलर या मनोचिकित्सक (आपके डॉक्टर के जरिए) भी आपकी मदद कर सकता है।

महत्वपूर्ण बिंदु यह है कि निस्सन्देह सही मदद के साथ पीएनडी उपचार योग्य है। आपके शिशु के लिए भी आपका अच्छा महसूस करना जरूरी है। दीर्घकालीन, प्रसव-पश्चात अवसाद का असर शिशु के विकास और शिक्षा पर भी पड़ता है।प्रसव-पश्चात अवसाद को ‘बेबी ब्लूज़’ न समझें जो कि कुछ महिलाओं में प्रसव के बाद कुछ दिनों से ज्यादा समय तक नहीं रहता है।

लगभग प्रत्येक 500 नई मांओं में से एक प्रसव-पश्चात होने वाले उस स्वास्थ रोग के गंभीर रूप से ग्रसित होती है जिसे प्यूर्परल साइकोसिस कहा जाता है। इसका अर्थ होता है कि उसे मतिभ्रम हो सकता है या वह कई दिनों तक जगी रह सकती हैं या वह अधिक ‘जोशीली’ और ऊर्जा से भरी हो सकती हैं। मां के आसपास के लोगों के लिए यह पूरी तरह से स्पष्ट होता है कि कुछ तो गड़बड़ है। बीमारी का यह रूप प्रसव-पश्चात अवसाद नहीं है और इसका तुरंत उपचार किया जाना चाहिए। कुछ महिलाओं को सही उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती होना पड़ सकता है।

आपकी माहवारी का फिर शुरू होना

  • यदि आप स्तनपान नहीं करा रही हैं तो आमतौर पर आपकी माहवारी, प्रसव के 4-8 हफ्तों के बाद शुरू हो जाती है।
  • यदि आपका शिशु बिना किसी पूरक आहार के पूरी तरह आपके स्तनपान पर निर्भर है तो आम तौर पर संभावना यह होती है कि आपकी माहवारी तब तक शुरू न हो जब तक कि आप अपने शिशु को स्तनपान कराने की संख्या को कम करना आरंभ नहीं कर देतीं।
  • हालांकि हो सकता है आपकी माहवारी न हो, और यह भी संभव है कि आप अंडोत्सर्ग करें और माहवारी दोबारा शुरू होने से पहले गर्भवती हो जाएं। यदि आप दूसरे बच्चे के लिए तैयार नहीं हैं तो आपको गर्भनिरोधन विधि पर विचार करना होगा।
  • बच्चे के जन्म के बाद महिलाओं की माहवारी चक्र का बदल जाना कोई असामान्य बात नहीं है। बहुत सी महिलाएं भारी रक्तस्राव होने की बात कहती हैं जबकि दूसरी महिलाएं कहती हैं कि उन्हें हल्की माहवारी होती है जिसकी अवधि लंबी नहीं होती।
  • शुरू में, ओव्यूलेशन (अंडोत्सर्ग) अनियमित होने की वजह से आपका माहवारी चक्र अनियमित हो सकता है। यह वास्तव में एक वैयक्तिक प्रतिक्रिया है और शायद यह हर मामले में अलग-अलग होगा।
  • यदि आप माहवारी में निकलने वाले रक्त की मात्रा को लेकर चिंतित हैं तो अपने डॉक्टर से सलाह लें।

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