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अनुशासन सिखाना शुरू करने का सही समय

आपका बच्चा हमेशा उन गतिविधियों का हिस्सा बनना चाहेगा, जिनमें किसी ना किसी रूप में खतरा है। पार्क में रेत खाने से लेकर उसके पालतू जानवर के ज़्यादा क़रीब जाने से माता-पिता के रूप में आपका चिंतित होना स्वाभाविक है। इस तरह के क्षण लगभग हर रोज़ देखने को मिलते हैं और यह तय करना कि बच्चे का हौसला तोड़े बिना उन्हें नुकसान से कैसे बचाया जाए, ऐसा सोचकर  आमतौर पर कोई भी माता-पिता व्याकुल हो सकते हैं।

इस छोटी उम्र में परंपरागत अनुशासतामक विधियां जैसे 'टाइम-आउट' प्रभावी नहीं हैं। तो , फिर कौन सी चीज़ कारगर हो सकती है? और ऐसे तरीके अपनाने के लिए सही आयु कौन सी होनी चाहिए?

जैसा कि आपने अनुमान लगा लिया होगा कि माता-पिता के लिए यह जानना उतना ही जरूरी है कि बच्चों को सही अनुशासन कैसे सिखाएँ जितना बच्चों के लिए सीखना ज़रूरी है कि कैसे कुछेक प्रकार के दुर्व्यवहार असुरक्षित या सामाजिक रूप से अनुपयुक्त हैं।

आखिरकार ,यह एक लंबी प्रक्रिया है, लेकिन यदि इसे सही तरीके से अंजाम दिया जाए तो यह एक सकारात्मक अनुभव होता है, जो आपके बच्चे के लिए हर हाल में बेहतर साबित होगा।

अनुशासन का जन्म

  • जब आपका बच्चा छोटा शिशु है तभी से सीमाएं निर्धारित करना, अच्छे व्यवहार को सुदृढ़ करना और कम वांछनीय व्यवहार को हतोत्साहित करना शुरू हो सकता है।
  • ऐसी चीजें हैं जो छोटे शिशुओं को भी नहीं करना चाहिए, उदाहरण के लिए आपके बालों को खींचना। बच्चों की भाषाई समझ  स्मृति और ध्यान अवधि सीमित होती है, इसलिए, प्रारंभिक अवस्था में प्रयुक्त सर्वोत्तम रणनीतियां उन्हें वास्तव में कोई शिक्षा दिए बिना हानि कम करने पर केंद्रित रहती हैं।
  • उनका ध्यान भटकाना (यानी उनसे उनकी वर्तमान गतिविधि छुड़ाकर बेहतर गतिविधि करने में मदद करना) और उन्हें अनदेखा करना - ये दो बहुत प्रभावी रणनीतियां हैं।
  • उदाहरणतय यदि आपके 4 महीने के शिशु को आपके बालों को खींचने में मज़ा आता है, तो आप धीरे से उसके हाथ हटा कर, उस पर चुंबन दे सकते हैं और फिर उसका ध्यान किसी मज़ेदार, उपयुक्त चीज़ या झुनझुने या अन्य खिलौने की ओर मोड़ सकते हैं।

बेशक आप सम्भाव्य रूप से खतरनाक व्यवहार को अनदेखा नहीं करना चाहते हैं लेकिन जब आपका 7 माह का शिशु उत्साह से अपनी ऊंची कुर्सी से अपना भोजन या खिलौने फैंकता  है, तो  उसे  अनदेखी करना मुनासिब है। वे अपने हाथों को नियंत्रित करना सीख रहे हैं और कारण और प्रभाव की अवधारणा को समझना भी शुरू कर दिया है। बेशक ऐसा व्यवहार आपको गुस्सा दिलाये, लेकिन याद रखें कि इससे परेशान होना या अतिरंजित नहीं होना चाहिए। बहुत से माता-पिता सोचते हैं कि जब उनके बच्चे लगातार रिमोट पर चैनल बदलते हैं, तो वे ऐसा उन्हें तंग करने की मंशा से करते हैं। जब कोई बच्चा ऐसा व्यवहार करता है तो माता-पिता अक्सर निराश हो जाते हैं। सबसे कारगर उपाय है - शांत आचरण बनाए रखना और अपना काम करते रहना।

8 से 12 महीने

जब आपका  शिशु 8 महीने के क़रीब रेंगना शुरू करता है  तो यह सीमायें बाँधने के बारे में सोचने का सही समय होता है। यकायक आपकी साइड टेबल पर पडी छोटी मोटी चीज़ों से लेकर बाथरूम की सिंक के नीचे पड़े टॉयलेट पेपर के रोलों तक, सब कुछ आपके नन्हें मुन्ने की पहुंच में जाता है

 इस उम्र का बच्चा केवल खोजना चाहता है, उन्हें क्या करना चाहिए या नहीं करना चाहिए, इसका उन्हें कोई पता नहीं होता है। यदि आप चाहते हैं की वे किसी वस्तु को ना छुएं तो चीज़ों को  उनकी पहुँच से बाहर रख कर घर को सुरक्षित बनाएं और बच्चों के अनुकूल वस्तुओं को प्रमुखता से रखें।

कहा जाता है कि यह बच्चे को परेशानी से दूर रखने का सबसे अच्छा तरीका है और इससे नियमों का पालन भी बहुत आसान हो जाता है।

  • अपने छोटे बच्चों को शरारत करते देख कई माता-पिता उन्हें 'ना' कहते हैं। दुर्भाग्यवशइस उम्र के बच्चों के लिए यह कारगर अनुशासनिक विधि नहीं है।
  • आपका बच्चा आपकी आवाज़ के लहज़े से समझ जाता है कि 'ना' का अर्थ 'मैं तुमसे प्यार करता हूं' से कुछ अलग है, लेकिन वे शब्द के वास्तविक अर्थ को समझ नहीं पाते हैं।
  • इसके अलावा उनमें आपकी बात पर ध्यान देने के लिए वांछित आत्म-नियंत्रण की कमी होती है।
  • कुछ चीजें उनकी सीमा से बाहर हैं - यह बात मज़बूती से सिखाने के लिए अन्य तकनीकों का उपयोग करें।

 

12 से 24 महीने

इस उम्र के आसपास आपके बच्चे का संचार कौशल विकसित हो रहा है, इसलिए यदि आपके घर में पालतू जानवर हैं, तो आप उन्हें "कुत्ते/ बिल्ली के बच्चा की पूंछ खींचना " जैसे मूल नियम समझा सकते हैं। आप समझ बूझ से 'ना' शब्द का प्रयोग, विशेष रूप से गंभीर स्थितियों में, शुरू कर सकते हैं। हालांकि, इस शब्द का अत्याधिक दोहराव इसकी धार को घिसा देता है और अंतत पूरी तरह से बेकार कर सकता है।

इस अवस्था में बच्चे के शारीरिक कौशल भी अपने पूर्ण रूप में रहे होते हैं। आपका चलता फिरता नन्हा मुन्ना अपनी नई नई आजादी से रोमांचित होगा, और अपनी पसंदीदा सभी चीजों को नहीं कर पाने पर निराश भी होगा।

  • जहां पर उनके गुस्से को आपकी तुरंत प्रतिक्रिया मिलनी चाहिए, वहीं पर ये भावात्मक बवंडर विकास प्रक्रिया का अंग हैं और इनके कारण उनका विशेषाधिकार छीनने या उन्हें उनके कमरे में भेजने जैसे कठोर दंड नहीं दिए जाने चाहियें।
  • जब आपके बच्चे को गुस्सा आता है , तो यह आपके लिए आपके बच्चे को जानने का सही समय है कुछ बच्चे उनका ध्यान भटकाने से जल्द शांत हो जाते हैं; दूसरों को गले लगाने की जरूरत होती है।
  • यदि ऐसा कोई गुस्से वाला समय बहुत लंबा खिंच जाए, तो अपने बच्चे को वहां से कहीं और ले जाएँ और उसे प्यार से बताएं कि क्या हो रहा है।
  • उदाहरणतय यह कहना, "अगर आप चिल्लाते रहोगे तो हम स्टोर में नहीं रुक सकेंगे" जब तक वे शांत नहीं हो जाते हैं।

आपके बच्चे द्वारा प्रभावी ढंग से संवाद करने में असमर्थता से उत्पन्न निराशा भी मारने या काटने का कारण बन सकती है। ऐसी स्थिति में उन्हें अनुशासित करते समय आपको अपने बच्चे को यह बताना है कि उन्हें जल्दबाज़ी में कुछ नहीं करना है, और उनका ध्यान किसी उपयुक्त गतिविधि की ओर मोड़ना है।

 

24 से 36 महीने

दो साल का होने पर दो वर्षीय कार्यक्रम, प्री-स्कूल और प्ले-डेट्स की शुरुआत होती है, जो आपके बच्चे के माजिककरण कौशल के मामले में बहुत अच्छे हैं, लेकिन इनसे अनुशासन की नई समस्याओं का जन्म होता है।

इस उम्र में खिलौने, समय और ध्यान सांझा करना मुश्किल काम है। जिस चीज़ से हालात और गुंझलदार बन जाते हैं वो यह है कि आपका बच्चा, जिसने खिलौना छीना है, के रास्ते में आपके परिवार से बाहर के बच्चे, यहां तक कि वयस्क भी, आते हैं

बच्चे सरल आदेश, सहानुभूति और कारण और प्रभाव समझ सकते हैं, इसलिए आप उन्हें अनुशासित बनाते समय ये तरीके अपना सकते हैं उदाहरण के लिए यदि आपका बच्चा अपने दोस्त का क्रेयॉन छीन लेता है, तो आप उसे कह सकते हैं, "हमें खिलौने नहीं छीनने चाहियें।रोहन का क्रेयॉन छीनने से उसे बुरा लगता है," और फिर उसके द्वारा पहला क्रेयॉन वापस देने पर उसे खेलने के लिए एक और क्रेयोन दे दें। छोटे बच्चों और प्री-स्कूली बच्चों को अनुशासित करने की कुंजी है - चीज़ों को बहुत सरल रखना। शोध के अनुसार लंबे समय तक डांट सहने वाले वयस्क उन लोगों से कम प्रभावी होते हैं जिन्हें छोटी और प्रत्यक्ष डांट सहनी पड़ती है । समय है टाइम आऊट का !

24 से 36 महीने की आयु के बच्चों पर भी 'टाइम-आउट' आज़माया जा सकता है। 'टाइम-आउट' एक अनुशासनात्मक विधि है, जिसमें आपके बच्चे द्वारा दुर्व्यवहार करने पर उसे अपनी कुर्सी पर या अपने कमरे में एक मिनट तक चुपचाप बैठना होता है, ताकि वह शांत हो सके (उम्र के हर एक साल के लिए एक मिनट)। उदाहरण के लिए 3-वर्ष के बच्चे को 3 मिनट का समय मिलता है। वे तभी उठेंगे जब आप कहेंगे कि 'टाइम-आउट' खत्म हो गया है।

निस्संदेह हर बच्चा अलग होता है और कोई भी अनुशासन विधि हमेशा कारगर नहीं होती है। लेकिन जितना अधिक अभ्यास आप इसे करेंगे, उतना ही अधिक आपका बच्चा सीमाओं को समझेगा और उचित व्यक्तिगत और सामाजिक व्यवहार विकसित करेगा।

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