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अनुशासन सिखाना शुरू करने का सही समय

1. सहज बने रहें और धीरे-धीरे शुरू करें

  • जब आप अपने शिशु के साथ संकेत भाषा में बात करना आरंभ करें, तो एक समय में एक ही संकेत बताएँ।
  • करीब पांच शब्‍दों के साथ शुरु करना अनुशंसित है और जब शिशु इन शब्‍दों पर प्रतिक्रिया व्‍यक्‍त करना आरंभ करने लगे तो आप शब्‍दों की संख्‍या को बढ़ा सकते हैं।
  • संकेत भाषा एक धीमी प्रक्रिया हो सकती है जो आपके शिशु की आयु पर निर्भर करती है।
  • यह सामान्‍य रूप से अलग-अलग बच्चे पर निर्भर करता है और इसके लिए सटीक आयु या अवस्‍था तय नहीं की जा सकती है।

2. धैर्य बनाए रखें

  • हर माता-पिता अपने शिशु को संकेत भाषा सिखाने में सक्षम होते हैं।
  • धैर्य में कमी कुछ माता-पिता के लिए प्रमुख दिक्‍कत होती है।
  • संकेत भाषा प्रक्रिया रातों-रात पूरी होने वाली कोई चीज नहीं है, बल्कि यह सापेक्षिक रूप से एक धीमी प्रक्रिया है जो अलग-अलग शिशु पर निर्भर करती है।
  • हतोत्‍साहित नहीं हों या पीछे न हटें। आपका शिशु आप से सीख रहा है और सीखेगा, सही समय आने पर, आप जान जाते हैं कि वे संकेत भाषा के जरिए समझ रहे हैं।
  • सीखने की यह प्रक्रिया आपके शिशु को बातचीत करने का अनमोल मौका देती है, इसलिए धैय बनाए रखें और संकेत भाषा का फायदा उठाएं।

3. निरतंरता बनाए रखें

  • एक बार जब आप शुरुआती पांच शब्‍दों का निर्धारण कर लें, तो नियमीत रूप से अपने शिशु के साथ इसका उपयोग करते रहें।
  • उदाहरण के लिए अगर आपने संकेत शब्‍द 'दूध' का चयन किया है और शिशु को दूध पिलाते समय इस संकेत शब्‍द से परिचय कराएं, हर बार जब आप अपने बच्चे को दूध पिलाएँ तो इसे जारी रखना सुनिश्चित करें।
  • मुख्य बात यह है कि आप संकेत शब्‍द को अपने दैनिक जीवन में शामिल करें।
  • हर बार जब आप 'दूध' शब्‍द का उपयोग करें तो इसके प्रति स्‍वत: प्रतिक्रिया विकसित करें और शब्द को जोर से बोलें।
  • पुनरावृति सफलता की चाभी है।

4. शिशु के स्‍तर पर खुद को रखें

  • जब आप अपने शिशु से बातचीत करें, आपको उनके स्तर पर रखना महत्‍वपूर्ण है।
  • अपने चेहरे की अभिव्‍यक्ति और संकेतों को शिशु की नजर क्षेत्र के दायरे में रखें। यह सुनिश्चित करता है कि आपका शिशु शब्‍द संकेतों को ठीक तरह से देख-सुन रहा है।
  • अगर आप किसी कोण से संकेत भाषा का उपयोग करते/करती है तो शिशु जो आपका संकेत देखेगा वह उससे बिल्‍कुल भिन्‍न हो सकता है जिसके सृजन की आप कोशिश कर रहे/रही हैं।

5. शिशु संकेत भाषा का उपयोग संदर्भ के साथ करें

  • जब शिशु संकेत भाषासीखा रहें हों, तो ऐसा करना महत्‍वपूर्ण है कि शब्‍द वर्तमान स्थिति से या उस क्षण विशेष की अनुभूति से मेल खाए।
  • अपने शिशु के सामने ऐसे किसीसंकेत भाषा का प्रयास करना निरर्थक है जब वह विशिष्ट संकेत किसी ऐसी का प्रतिनिधित्व कर रहा हो जो पहले कभी हुई है।
  • उदाहरण के लिए, अगर आप अपने शिशु के साथ टहलने जाते हैं और वहां एक कुत्‍ता नजर आता है तो अगले किसी दिन टहलने के समय संकेत शब्‍द 'कुत्‍ता' से शिशु को अवगत कराना और यह कहना कि 'कल हमने पार्क मेंजो कुत्‍ता देखा था उसे याद करो’ निरर्थक है। यह अनुशंसा की जाती हो कि जितना ज्‍यादा हो सके संकेत का उपयोग करने और शिशु को इससे अवगत कराने के लिए वर्तमान स्थितियों को ही चिह्नित करें।
  • उदाहरण के लिए, जब आप कुत्‍ते की कहानी पढ़ें, टेलीविजन पर कोई कुत्‍ता दिखाई पड़े या अपने पालतू जानवर की ओर इंगीत करें तो 'कुत्‍ता' शब्‍द संकेत का इस्‍तेमाल करें।

6. संकेत और बोले जाने वाले शब्‍दों का हमेशा एक साथ उपयोग करें

  • सुनिश्चित करें कि जब भी आप किसी शब्‍द का संकेत करें तो इसके साथ इस शब्‍द का उच्‍चारण भी करें।
  • यह आपके बच्चे को तेजी से दोनों के बीच संबंध स्थापित करने में सक्षम बनाता है।

7. प्रेरक संकेतों का उपयोग करें

  • जब आप अपने शुरुआती शब्‍दों का चयन कर हैं तो यह महत्‍वपूर्ण है कि आप 'व्‍यवहारिक' और 'प्रेरक' शब्‍दों का संयोजन करें।
  • जब संकेत भाषा आपके घरेलू माहौल में पूरी तरह सेप्रचलन में होती है तो 'व्‍यवहारिक' शब्‍द ऐसे शब्‍दों को रेखांकित करते हैं जो आपके और आपके शिशु के जीवन को आसान बनाते हैं।
  • ये शब्‍द काफी सामान्‍य शब्‍द होते हैं और इनमें खाना, पीना, बदलना, दर्द होना, सोना आदि शामिल हैं।
  • शब्द जो आपके शिशु के लिए प्रेरक या रुचिकर हैं उनके साथ इन शब्दों का संतुलन बनाना महत्वपूर्ण है।
  • 'प्रेरक' शब्‍दों में टेडी बीयर, गेंद, खेल आदि शामिल हो सकते हैं। ये कुछ ऐसी खास चीजें हैं जिनमें आपके शिशु ने रुचि दिखाई हो।

8. परिवार के सदस्‍यों और देखभाल करने वालों को शिक्षित करें

  • यह महत्‍वपूर्ण है कि जो संकेत आप अपने शिशु के साथ उपयोग कर रहे हैं उससे वे लोग भी परिचीत हों जो आपके शिशु के साथ नियमीत रूप से संपर्क में हैं।इससे निरंतरता सुनिश्चित होगी।
  • आपका शिशु संकेतों को जितना ज्‍यादा देखेंगे उतना ही जल्‍द वह उसे पहचानना आरंभ कर देगा।
  • चाइल्ड केयर फ़ैसिलिटी धीरे-धीरे अपने दैनिक देखरेख में संकेत भाषा का उपयोग आरंभ कर रही हैं, इसलिए संबंधित व्‍यक्ति को निरंतर इस बात से अवगत कराएँ कि आप अपने शिशु के साथ किस तरह के संकेतों का उपयोगकरते हैं।

9. हर संकेत के साथ उपयुक्‍त भाव-अभिव्‍यक्ति का उपयोग करें

  • यह विशेष रूप से तब महत्‍वपूर्ण हो जाता है जब सीखाने की प्रक्रिया को आपका शिशु अनुभूत करता हो या इससे संवेदित होता हो।
  • संकेत भाषा बहुत दृश्‍यगोचर भाषा है और बधिर समुदाय के सदस्‍य अपने चेहरे को संकेत भाषा प्रक्रिया के हिस्‍सा के रूप में उपयोग करते हैं।
  • जब किसी अनुभूति की अभिव्‍यक्ति कर रहे हों तो अपने चेहरे पर इसे स्‍पष्‍ट रूप से चित्रित होने दें।
  • जब खुशी के शब्‍द का संकेत कर रहें हों तो खुशी की भावना को तेज मुस्‍कुराहट के साथ प्रकट किया जा सकता है।
  • भौंह को सिकोड़ कर या हैरत भरी दृष्टि के जरिए भय की अनुभूति को प्रदर्शित किया जा सकता है।
  • कुछ शब्‍दों के लिए चेहरे से अभिव्‍यक्ति की आवश्‍यकता नहीं होती या कुछ शब्‍दों के साथ चेहरे की अभिव्‍यक्ति उपस्थित नहीं होती।
  • संकेत भाषा शुरू करने वालों के लिए अपने चेहरे पर भाव लाना प्रारंभ में कुछ अटपटा हो सकता है।
  • अभ्‍यास के लिए दर्पण के सामने खड़े होकर देखें कि क्‍या आप अपने चेहरे की अभिव्‍यक्ति से वैसा कुछ समझ पा रहे हैं जिसका आप संकेत करने की कोशिश कर रहे हैं।
  • याद रखें की आप अपने चेहरे के साथ अपने संकेतों को कम से कम व्यक्त करने की बजाय अति-व्यक्त करने के लिए बेहतर हैं।

10. अपने शिशु के प्रयास को प्रोत्‍साहन दें

  • जब आपका शिशु संकेत को पढ़ना शुरू करता है, तो वह संभवत: 100% शुरू में सही नहीं होगा।
  • हालांकि यह महत्‍वपूर्ण है कि उनके द्वारा किए गए प्रयासों के लिए उनकी प्रशंसा करें और संकेत शब्‍दों को सही रूप में दोहराएं।
  • अगर बच्‍चा आपको दिखाए कि उसे किसी चीज की जरूरत है, तो उसे वह चीज दें भले ही संकेत पूरी तरह सही नहीं हो।
  • वह महसूस करना शुरू कर देंगे कि संकेत भाषा काम कर रही है।

11. लुत्‍फ लें!

  • संकेत भाषा एक सुंदर दृश्‍य भाषा है और इसे लेकर परेशान होने की जरूरत नहीं है।
  • अगर संकेत भाषा का उपयोग करते आप परेशान हो जाते हैं, तो आपका शिशु इसे ध्यान में रखेगा,इसलिए घबड़ाएं नहीं।
  • संकेत भाषा का उपयोग आपके लिए और आपके शिशु के लिए मजेदार होना चाहिए, इसे उबाऊ कार्य की तरह नहीं बल्कि दैनिक जीवन के हिस्‍सा के रूप में लेना चाहिए।
  • आराम करें, मज़ा करें और यह सुंदर भाषा जो आपके और आपके शिशु को लाभ प्रदान करती है उसका आनंद लें।


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