आपके शिशु के मन में क्‍या है?

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आपके शिशु के मन में क्‍या है?

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जब आपका शिशु बालबाड़ी जाना आरंभ कर देता है तब तक वह बात करने, टहलने और भोजन करने में निपुण हो जाता है। वह ठीक तरह से शौचालय का इस्‍तेमाल करने में भी सिद्धस्‍थ हो जाता है। अब वह दोस्‍त बनाना शुरू करदेता और प्रश्‍न पूछने और जवाब देने में सक्षम हो जाती है। वास्तव में, 0-3 आयु वर्ग के बच्चे किसी अन्य आयु वर्ग की तुलना में रोजमर्रा की बातचीत के माध्यम से अधिक सीखते हैं।

आपका शिशु आपको देख रहा है!

वह पहली एक चीज जो आपका शिशु सीखेगा वह है आपका ध्‍यान आकर्षित करना। इसके कई कारण हो सकते हैं- जैसे कि उसे भूख लगी हो, उसके डॉयपर गंदे हो गए हों, वह थका  हो या वह रो भी सकता है। इस प्रक्रिया में वहमानवीय भावनाओं को भी सीखता है। वह जानता है कि कैसे कार्य करना है, आपको हसाएंगा और आपका  । इस प्रक्रिया में वह आपकी प्रतिक्रिया का अवलोकन कर पता कि आपको किस चीज से गुस्‍सा या आनंद आता है।.कहा जाता हैं कि बच्‍चे जानकारी को स्‍पंज की तरह सोखते हैं। यह सच है। जब 3 से कम आयु के बच्‍चे को दूसरी भाषा में बातचीत करने के लिए कहा जाता है तो खुद को कभी नहीं बताते कि वे यह नहीं कर सकते। वे इसे देखकर, सुनकर औरआजमा कर सीखते हैं। 3 वर्ष का बच्‍चा जानकारी को देखता है, इसे अपने जेहन में दर्ज कर इससे है। वह एक वयस्‍क की तुलना में दोहरी गति से सीखता है।

आसपास की हर चीजों से सीखने में अपने शिशु की मदद करें। 

अपने शिशु की सीखने की प्रवृति को बढ़ाने या उसमें अतिरिक्‍त उत्‍साह पैदा करने के लिए उसके साथ ज्‍यादा समय गुजारें। अगर आप कार्यालय में कार्यरत हैं तो सुनिश्चित करें कि आपका बच्‍चा उच्‍च गुणवत्‍ता की देखरेख वालीव्‍यवस्‍था में है या नहीं। शिशुओं और बच्चों के लिए आदर्श स्थिति यह है कि उसके आसपास ध्‍यान रखने वाले कई वयस्‍क, बड़े बच्‍चे रहें जो उसके साथ उन्‍नत माहौल में नियमीत रूप से खेलते रहें। बच्‍चे के साथ समय साझा करते हुएउसके संग खेलें, उससे बातचीत करें और चौकस रहें। हर मौके का सही तरह से इस्‍तेमाल करें। अगर वह नृत्‍य के लिए उत्‍सुक हो तो उसके साथ नृत्‍य करें। अगर वह लुकाछिपी खेल रहा हो तो उसमें शामिल हों। सहज रहें:स्‍फूर्त रहेंऔर फर्श पर बैठकर उससे मेल-मिलाप करें। आपका बच्‍चा उन स्थितियों में सीखेगा जहां खेल की गुंजाइश नहीं होगी।

बच्चे और वयस्कों का महत्वपूर्ण मेल-मिलाप 

एक महत्‍वपूर्ण शोध में पता चला है कि वयस्‍कों के संपर्क से दूर रहने पर 'शिशु का विकास'  खराब हो सकता है। इस तरह से शिशु अपने आसपास मौजूद शोर, जीवन, माहौल के बारे में ज्ञान हासिल करेगा। इस तरह वह अपनीसंभावनाओं का पता लगाता है। वैसे तो कई कारक हैं जो आपके शिशु के विकास में अपना योगदान देते हैं, लेकिन माता-पिता को जानना चाहिए कि पहला तीन वर्ष काफी महत्‍वपूर्ण होता है और उसे हल्‍के में नहीं लेना चाहिए। ये सबसुनिश्चित करें:

  • उसके साथ अक्‍सर मेल-मिलाप करें और कई तरह से करें।
  • जिन चीजों में शिशु की रुचि हो उसमें अपनी रुचि प्रदर्शित करें।
  • खेलने के दौरान या अन्‍य घड़ी में उसे प्रयास और प्रयोग करने दें।
  • उसके लिए सीखने के अलग-अलग प्रकार के अवसर तैयार करें। उदाहरण के लिए बर्तन, साफ वस्‍त्रों की एक टोकरी, खाली बक्‍से आदि।
  • दृढ़ सीमा निर्धारित करें।
  • जो आचरण आपको अस्‍वीकार्य लगे उसके प्रति एक समान बने रहें।
  • बच्‍चे को अपने स्‍नहे और गर्व से अवगत कराएं।

आखिरकार, अगर आपके शिशु को अच्‍छी गुणवत्‍ता से युक्‍त देखरेख नहीं मिलती है तो उसके ज्ञान में कमी रहेगी। बाल-विहार में पहुंचने तक उसकी  समान्‍य तौर पर जो मानसिक और भावनात्‍मक विकास होने चाहिए वह उससेदूर  है।  और यही कारण है कि उसे उसकी बुद्धिमानी के स्‍तर तक पहुंचाने में मदद करने जैसे बात  पर आपको अवश्‍य ध्‍यान देना चाहिए।