Everything you need to know about your baby's emotions

Join Huggies now to receive week by week pregnancy newsletters.
Back to अपने बच्चे के साथ रिश्ता बनाना

आपके शिशु की भावनाओं के बारे में सब कुछ

All about baby emotions All about baby emotions

आपके शिशु की पहली मुस्‍कुराहट बेहतरीन भावनाओं की महज शुरुआत है जो आपके शिशु में प्रथम वर्ष के दौरान विकसित होती है और दिखती है।  तीन महीने के होते-होते, शिशु हाव-भाव को 'पढ़ना' और बढ़ते स्‍मरण पटल पर जानकारी को संग्रहीत करना शुरू कर देते हैं। जैसे-जैसे वे बड़े होते हैं ये संग्रहीत अनुभव उन्‍हें अपनी भावना का प्रबंधन करने और उन पर नियंत्रण करने में मदद करते हैं। 

ये सब एक छोटी मुस्कुराहट के साथ आरंभ होते हैं

  • 3 महीने में आपका शिशु आपके साथ और परिवार के नजदीकी सदस्‍य के साथ घुलने-मिलने का आनंद लेना शुरू कर सकता है। 
  • वे आसानी से मुस्‍कुराते हैं और दूसरों के चेहरे के प्रति उनका गहरा लगाव हो सकता है। 
  • शिशु  दूसरों की भावनाओं  और हाव-भाव के बारे में तब सीखते हैं जब वे सामाजिक मेल-मिलाप को देखते, सुनते और उनमें भाग लेते हैं। 
  • इस दौरान आप कई तरह की हल्‍की मुस्‍कान सुनने की भी अपेक्षा कर सकते हैं।  
  • हल्‍की मज़ेदार ‘गड़गड़ाट’ की आवाज करना, उनके गाल पर चिकौटी काटना या उनके पेट पर गुदगुदी करना, शिशु को हंसाने का सबसे बेहतर तरीका है।   
  • आपका शिशु भविष्‍य में विभिन्‍न परिस्थितियों में किस तरह प्रतिक्रिया करेगा वह सब बहुत कुछ आपको प्राप्‍त होने वाली प्रतिक्रिया पर निर्भर करता है।
  • वे दूसरों की भावनाओं  को पढ़ने की क्षमता पहले ही हासिल कर लेते हैं और करीब 3.5 महीने की आयु में माता-पिता के हाव-भाव को पहचानने लगते हैं। 
  • वे अपने माता-पिता को काफी नजदीक से देखने की कोशिश करते हैं, इसलिए यह महत्‍वपूर्ण है कि आप अपनी भावना को नियंत्रण में रखें। आखिरकार शिशु बेचैनी की भावना को भी आनंद की अनुभूति की तरह समझ सकते हैं।
  •  उनके साथ मधुर स्‍वर और हाव-भाव के साथ बात करें। 
  • जब आपका शिशु सतर्क हो और सामाजिकता की भावना महसूस कर रहा हो तो उनकी मुस्‍कुराहट और मधुर शोर का जवाब दें। 
  • अपने शिशु को सुनना और उनसे बात करना महत्‍वपूर्ण है। 
  • जब आपका शिशु सतर्क हो और सामाजिकता की भावना महसूस कर रहा हो तो उनकी मुस्‍कुराहट और मधुर शोर का जवाब दें। 
  • अपने शिशु को सुनना और उनसे बात करना महत्‍वपूर्ण है। 
  • जब वह बेचैन हो, भयभीत हो या रो रहा हो तो हार्दिक और सुखदायक तरीके से प्रतिक्रिया करें।
  • अपने बच्‍चे को चादर में लपेटने की कोशिश करें या उसे गलपट्टी में अपने शरीर से लगाएँ। 
  • आसपास टहले या कमरे में हल्‍का संगीत चलाकर उसे सुनाएं। 

अपने शिशु में विकसित होने वाली गतिविधियों पर ध्यान दें

  • 6 से 9 महीने की अवधि के दौरान आपके बच्‍चे ऐसे लक्षण विकसित करने शुरू करते हैं जो उनके अपने और अनूठे लक्षण होते हैं।
  •  अब तक, आप उनके स्‍वभाव से अवगत हो चुके  हैं और आप जानते हैं कि वे एक 'स्वर' प्रदर्शित करते हैं जो स्वयं में अलग है।
  • जब नहाने का समय होता है तो संभवत: वे उत्‍तेजित हो जाते हैं या सोने के समय वे आपकी बाहों से लिपट जाते हैं।
  • उन्हें इस बात का पूर्व ज्ञान हो सकता है कि किसने उनके प्रति सकारात्‍मक या नकारात्‍मक भाव प्रकट किया था। 
  • किसी की अचानक तेज आवाज या उनकी मां के स्‍पर्श में आक्रोश है, ऐसी  सभी बातें उनके स्‍मरण में होती हैं।
  • इस आयु में शिशु उन लोगों के साथ रहना पसंद करते हैं जिनसे उन्हें स्‍नेह मिलता है। 
  • नजदीकी देखभाल करने वालों के प्रति जुड़ाव विकसित होता है इसलिए उनमें 'अलगाव की बेचैनी' की भावना की अनुभूति शुरू होना स्‍वभाविक है। 
  • इस आयु में ज्‍यादातर शिशु माता-पिता के नजर से दूर होने पर बेचैनी और भय का प्रदर्शन करते हैं।  हालांकि माता-पिता के लिए हतोत्साहित हो सकते हैं, लेकिन यह आचरण सामान्‍य है। इसका सामान्‍य अर्थ है कि आपके शिशु का स्‍मरण परिपक्‍व हो रहा है।  
  • लुकाछिपी जैसे खेल उन्‍हें यह सीखने में मदद करते हैं कि जो लोग या वस्‍तु नजर से दूर होते हैं वे फिर लौट आते हैं।

  मॉडल आचरण अधिसूचना 

  •  जब आपका शिशु प्रथम वर्ष के आखिरी महीने में प्रवेश करता है, तो वह कई तरह की भावनाओं का प्रदर्शन करने में सक्षम हो चुका होता है।  

  • वे अपने जान-पहचान और अनजान लोगों के बीच अंतर करने में सक्षम हो जाते हैं। 
  • अब वे ज्‍यादा चंचल हो सकते हैं और अपने आसपास की चीजों को खुद जानने के प्रति उत्‍सुक होते हैं। 
  • उनकी नवआजादी उन्‍हें सुरक्षित होने का एहसास देती है वे कुछ दूर जाने के बाद पुन: स्‍नेह देने वालों के पास लौट आते हैं। 
  • जो अरुचिकर मामले कभी उन्हें रूला देते थे अब वे दूर हो गए हैं और अब अपनी असहमति के लिए बस अपना सिर हिलाते हैं।
  • वे झल्‍लाहट या आक्रोश के संकेत हो सकते हैं और संभवत: आपको उनके पहले गुस्से का आवेग देखने को मिल सकता है।   
  • कई बार शिशु ज्‍यादा उत्‍तेजित या अति उद्दीपित हो जाते हैं जिससे झल्‍लाहट हो सकती है। 
  • एक चिल्लाहट भावनावों के बाद, माता-पिता को सलाह दी जाती है कि वे अन्‍य गतिविधि करने का प्रयास करें। अपने शिशु को उनकी भावना प्रकट करने का मौका दें, नकारात्‍मक भावना को किस तरह जल्‍द से जल्‍द व्‍यवस्थित किया जाये इस पर मदद करने से पहले उन्हें शांत करें।  
  • इस अवस्‍था में छोटे गले लगाने योग्‍य कोमल चीजों से बने जंतुओं या कोमल कंबल आपके शिशु में सुरक्षा की भावना का संचार करेगा, जो हमेशा बदलने वाली उनकी आसपास की दुनिया को जानने समझने में आगे उसके लिए मददगार होगा। 

आपका शिशु आपको देखकर आप से सीखता है

  •  यह विचार कि शिशु आपकी हर गतिविधि को देखता है हम में से कुछ को काफी अशांत और अति सुरक्षात्‍मक बना देता है। 
  • बेहतर यह है कि आप शिशु से जो अपेक्षा रखते हैं वैसा ही व्‍यवहार खुद करें। 
  • आयु के लिए उपयुक्‍त और अपने शिशु के स्‍वभाव के अनुसार दिशा-निर्देश तैयार कर उसे लागू करें। 
  • अस्‍वीकार्य आचरण पर न तो हंसे न ही मुस्‍कुराएं।  आपके चेहरे पर मुस्‍कुराहट देखकर उन्‍हें अपने आचरण को दोहराने का प्रोत्‍साहन मिलेगा। 
  • उन की मुस्‍कुराहट और गड़गड़ाहट की नकल करना 
  • जब आपका शिशु आक्रोश दिखाए तो उसे दृढ़ता से थामे, उनका ध्‍यान दूसरी ओर ले जाएं और शांत लेकिन निश्चयात्मक रहें। इस तरह की गतिविधियों के साथ  संगत होना महत्‍वपूर्ण है। 
  • अपने आसपास के लोगों के साथ नजदीकी संबंध विकसित करने के लिए शिशु को हार्दिक और पूर्वानुमान लगाने योग्‍य माहौल की आवश्‍यकता होती है।  

अगर उनकी उपेक्षा होती है या उनकी भावना का यथोचित कद्र नहीं होती है तो जिंदगी में आगे उन्हें सकारात्‍मक संबंध बनाने में दिक्‍कतें हो सकती हैं।