भाई-बहन की प्रतिद्वंदिता को कैसे संभालें?

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भाई-बहन की प्रतिद्वंदिता को कैसे संभालें?

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भाई-बहन की प्रतिद्वंदिता को कैसे संभालें?

परिदृश्य 1:

अपने छोटे भाई तो रोते हुए सुनकर शिवानी बेडरूम की ओर भागती है ।वह अपने बड़े भाई को गुस्से से घूरती है ।वह एक बनावटी मुस्कराहट के साथ बोला, “मैंने उसे नहीं मारा!मैं तो बस उसके साथ खेल रहा था ।”

परिदृश्य 2:

चाय पार्टी के दौरान दूसरी माताओं के साथ नेहा, “मैं कितनी भाग्यशाली हूं कि उन संक्षिप्त क्षणों के दौरान मेरे बच्चे एक दूसरे से कितना प्यार करते हैं जब वे एक-दूसरे से मार पीट नहीं कर रहे होते हैं ।

उपरोक्त में से कोई भी परिचित लगता है?यह अजीब लगता है कि जब कोई भाई-बहन कहता है, तो प्रतिद्वंदिता शब्द इसके पीछे आता है ।भाई-बहन प्रतिद्वंदिता बच्चों के बारे में सबसे परेशान करने वाली चीज़ है और इसलिए पालन-पोषण की किताब में सबसे महत्वपूर्ण अध्याय है ।प्रतिद्वंदिता का मतलब चाहे दीर्घकालिक सकारात्मक या नकारात्मक संबंध का संकेत हो, परंतु माता-पिता होने के नाते आपको भाई-बहन प्रतिद्वंदिता को नियंत्रित रखना होगा ।

आपका कार्य आपके छोटे बच्चे के जन्म से पहले ही प्रारंभ हो जाता है ।मां के गर्भ में बच्चे की तस्वीरें दिखाकर बड़े बच्चे को नए बच्चे से परिचित कराएं ।बड़े बच्चे को गर्भ के गर्भस्‍थ शिशु को महसूस करने की, बात करने की और लात महसूस करने की अनुमति दें ।उसे ऐसी तस्‍वीरे दिखाएं कि गर्भस्‍थ शिशु जन्‍म के बाद, अस्‍पताल से आने पर कैसा दिखाई देगा और उसके डायपर बदलने की तस्‍वीर भी दिखाएं ।बड़े बच्चे को उसके बचपन की घटनाओं के बारे में बताने से वह अपने भाई अथवा बहन के प्रति प्रतिक्रिया देने के लिए तैयार हो जाएगा.

नवजात शिशु के साथ अपने माता-पिता, अपनी कीमती वस्‍तुओं को साझा करने का विचार बड़े बच्‍चे को सचमुच नाराज और परेशान कर सकता है ।आपको अपने नवजात शिशु को शुरुआती स्‍तर पर अपना 200 प्रतिशत देने की आवश्‍यकता होती है, लेकिन सुनिश्चित करें कि ऐसा करते समय बड़े बच्‍चे की अनदेखी न हो।यदि संभव हो तो लगभग प्रतिदिन अपने बड़े बच्चे के लिए “विशेष समय” से शुरुआत करें।दिन की शुरुआत में 25 मिनट अपने बड़े बच्चे की गहन देखरेख में बिताने से बड़े बच्चे की नवजात शिशु के प्रति गुस्‍से की भावना दूर हो सकती है और यह समय शेष दिन के लिए एक अच्‍छा निवेश होगा।

बड़े बच्चे के बीच शक्ति संघर्ष से अच्‍छी तरह से निपटने के लिए अपने बड़े बच्‍चे में नवजात शिशु के प्रति जिम्‍मेदारी की भावना भरें।बड़े बच्‍चे को नवजात शिशु के संबंध में कुछ पर्यवेक्षण संबंधी जिम्‍मेदारी दें।इससे बड़े बच्‍चे अपेक्षाकृत अधिक देखभाल और पालन-पोषण करने के लिए प्रेरित होंगे।इस देखभाल को महसूस करने पर आपका छोटा बच्‍चा अपने बड़े भाई-बहन का सम्‍मान करने लगेगा और उसके प्रति अधिक प्‍यार दर्शाएगा।

नीचे आपके लिए कुछ अतिरिक्‍त सुझाव दिए गए हैं:

  •  यदि आपके बच्‍चे हमेशा लड़ते रहते हैं तो आपको परेशान महसूस नहीं करना चाहिए अथवा स्‍वयं को अयोग्‍य नहीं समझना चाहिए। भाई-बहन की प्रतिद्वंदिता बड़े होने की स्‍वाभाविक प्रक्रिया है और उनका आपस में झगड़ना, समझौता करना और फिर से लड़ना अच्‍छा होता है। 
  • उनकी बहस में केवल तभी हस्‍तक्षेप करें जब वे उग्र होने लगें।अन्‍यथा, बीच में पड़ने के लिए अधिक उतावले न हों। यदि वे अपने आप लड़ते हैं और अपनी समस्‍या का स्‍वयं समाधान निकालते हैं तो उनमें आत्‍म–विश्‍वास और आत्‍म-निर्भरता आती है। किसी भी स्थिति में, आप हमेशा उनके पास नहीं हो सकते हैं। 
  • उनके बीच जज अथवा रेफरी न बनें। किसी का भी पक्ष लेना अच्‍छी बात नहीं है। आप पर हमेशा पक्षपात के आरोप लगेंगे। यदि आपको कोई निर्णय लेना है तो उन दोनों की बात सुनें और वस्‍तुनिष्‍ठ और सुसंगत निर्णय लें। निर्णय संक्षिप्‍त और स्‍पष्‍ट होना चाहिए। 
  • “अहिंसा” को सख्‍त नियम बनाएं, जिसका घर के सभी बच्‍चों को पालन करना चाहिए। 
  • सकारात्‍मक अथवा नकारात्‍मक लेबल लगाना बच्‍चों पर अनावश्‍यक दबाव डालता है। इसी प्रकार, अपने पूरे न हुए सपनों को अपने बच्‍चों के माध्‍यम से पूरा करने का प्रयास न करें। उन्‍हें उनकी प्रतिभा और क्षमता के अनुसार विकसित होने के लिए प्रोत्‍साहित करें।
  • बच्‍चों के बीच कभी तुलना न करें। कभी-कभी माता-पिता इस नियम को भूल जाते हैं और अपने बच्‍चों की अन्‍य बच्‍चों के साथ तुलना करने लगते हैं, जैसे उनके सहपाठियों, पड़ोस के बच्‍चों अथवा उनके चचेरे भाई-बहनों के साथ। 
  • परेशानी के बिन्दुओं का पूर्वानुमान लगाएं और “खतरे के संकेतों” की शीघ्र पहचान करें। 
  •  जब आपके बच्‍चे शारीरिक रूप से हिंसक होने लगें तो एक-दूसरे की सुरक्षा करें।  कभी-कभी आपके बड़े बच्‍चे को छोटे बच्‍चे की अपेक्षा अधिक सुरक्षा की आवश्‍यकता होती है। आमतौर पर, बड़े बच्‍चे से अपेक्षा की जाती हैकि वह छोटे बच्‍चे के लिए त्‍याग करें, जबकि इस तथ्‍य पर विचार नहीं किया जाता है कि बड़े बच्‍चे की भी अपनी आवश्‍यकताएं हैं।
  • व्‍यवहार सुधारने और पुरस्‍कार प्रणाली अपनाने का प्रयास करें। अच्‍छे व्‍यवहार का उल्‍लेख किया जाना चाहिए और तारीफ की जानी चाहिए। लेकिन जब एक बच्‍चा दुर्व्‍यवहार करे तो उससे पुरस्‍कार वापिस लेने से न झिझकें।

  • सुनिश्चित करें कि प्रत्‍येक बच्‍चे का अपना निजी स्‍थान हो जहां वह अकेला रह सके और जहां वह अपने खिलौने, पुस्‍तकें आदि रख सकें। सुनिश्चित करें कि आपके दूसरे बच्‍चे उसके निजी स्‍थान का सम्‍मान करें। 

भाइयों-बहनों के बीच झगड़ा होना पारिवारिक संबंधों में एकदम सामान्‍य बात है। माता-पिता के रूप में, आपको भाई-बहन प्रतिद्वंद्विता को समाप्‍त नहीं करना है। बजाए इसके, यदि इसको अच्‍छी तरह से संभाला जाए तो यह रचनात्‍मक हो सकती है। से आशय है कि आपको अनेक भूमिकाएं निभानी है – अध्‍यापक, रैफरी, कोच, मनोवैज्ञानिक और दोस्‍त। इन सभी भूमिकाओं को निभाने के दौरान, अपने बच्‍चों के साथ निरंतर बातचीत करने से जीवनभर दोस्‍ती कायम रखने में मदद मिल सकती है।